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  • More than 5 million people die each year because of extreme temperature conditions

  • Global COVID-19 death toll crosses 4 million

तूफान

कब आएगा और कितना भयंकर होगा तूफान, पता लगाएगा यह मॉडल

वैज्ञानिकों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने इन प्राकृतिक घटनाओं के प्रभाव का बेहतर ढंग से पता लगाने के लिए एक नया मॉडल बनाया है

सूखा

2030 तक वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा जलवायु परिवर्तन: सैन्य विशेषज्ञ

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, 2040 तक जबरिया विस्थापन और प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि होने की संभावना है

तूफान

दुनिया भर में बढ़ रही है प्रवासियों की संख्या, भारतीय सबसे अव्वल: रिपोर्ट

वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 में कहा गया है कि हिंसक घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के कारण लोग अपने घर छोड़ कर दूसरे स्थानों पर ...

सूखा

मरुस्थल में बदल चुका है भारत का 30 फीसदी इलाका, 8 राज्यों में हालात बुरे

विश्व मरुस्थलीकरण रोकथाम दिवस: भारत के 21 जिलों में 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा मरुस्थल में तब्दील हो चुका है 

सूखा

वैज्ञानिकों ने बनाई नई प्रणाली, महीनों पहले दे देगी सूखे की चेतावनी

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है, जो महीनों पहले ही सूखे की चेतावनी देती है। यह प्रणाली उन करोड़ों किसानों के ...

मानवीय कारणों से बढ़ रहा है दक्षिण पूर्व एशिया में सूखे का खतरा: अध्ययन

सूखे पर मानवजनित दबाव का प्रभाव पहले ही 20वीं शताब्दी के अंत में यहां की आंतरिक जलवायु में होने वाले बदलावों को पार कर चुका है।

उत्तराखंड में 60 घंटे तक लगातार भारी बारिश, नदियों का जलस्तर बढ़ा

उत्तराखंड में अब तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, लेकिन जगह-जगह भूस्खलन के कारण लोग सहमे हुए हैं

पिछले 20 वर्षों में भारत सहित दुनिया के 150 करोड़ लोगों को सूखे ने किया है प्रभावित

1998 से 2017 के बीच 150 करोड़ से भी ज्यादा लोग सीधे तौर पर सूखे से प्रभावित हुए हैं, साथ ही इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को 9.2 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है

खतरे में गौरा का गांव, गौरा देवी की प्रतिमा भी हटाई

जंगलों को बचाने के लिए जिस गांव रैणी से चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई, आज उसी गांव पर अस्तित्व का संकट बना हुआ है

हजारों साल पहले लद्दाख के ठन्डे मरुस्थल में आती थी भीषण बाढ़, अध्ययन में हुआ खुलासा

विश्लेषण से पता चला है कि कभी यहां का तापमान तुलनात्मक रूप से काफी ज्यादा था, जिस वजह से ग्लेशियरों के पिघलने के कारण भीषण बाढ़ आया करती थी

भारी हिमस्खलन का नतीजा थी चमोली आपदा, शोध में आया सामने

जलवायु परिवर्तन और इंसानी हस्तक्षेप के चलते न केवल इस तरह की आपदाओं में इजाफा होगा साथ ही यह और रौद्र रूप धारण कर सकती हैं

भारतीय वैज्ञानिकों की खोज, उपग्रहों से पहले मिलेगी उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की सटीक चेतावनी

इस नई तकनीक की मदद से उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में बनने वाले चक्रवाती तूफानों का पता कम से कम चार दिन पहले ही लगाया जा सकता है

अगले 12 घंटों में और कमजोर पड़ेगा चक्रवाती तूफान यास

तूफान यास के कमजोर पड़ने के बाद भी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश के रूप में इसका असर देखा जा रहा है